ललितपुर गेहूं घोटाला: 55 लाख का गबन, सचिव राघवेंद्र चौहान पर FIR

ललितपुर गेहूं घोटाला: 55 लाख का गबन, सचिव राघवेंद्र चौहान पर FIR
9 अप्रैल 2026 Sanjana Sharma

उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में सरकारी अनाज की खरीद में एक ऐसा खेल सामने आया है जिसने सहकारी विभाग की नींद उड़ा दी है। करीब 55.87 लाख रुपये की सरकारी राशि का गबन और 2070 क्विंटल गेहूं का रहस्यमयी तरीके से गायब होना कोई मामूली चूक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश लगती है। इस पूरे मामले का केंद्र सहकारी समिति के सचिव राघवेंद्र सिंह चौहान हैं, जिनके खिलाफ अब पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

कहानी शुरू होती है गेहूं की सरकारी खरीद से, जहां किसानों से अनाज लेकर उसे भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों तक पहुंचाना होता है। लेकिन यहां तो खेल ही कुछ और था। कागजों पर तो खरीदारी हुई, लेकिन अनाज गोदाम तक पहुंचने से पहले ही 'गायब' हो गया। हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब तब हुआ जब सचिव खुद को केंद्र प्रभारी बता रहे थे, जबकि असल में कमान किसी और के हाथ में थी।

जांच में कैसे खुला झूठ का पुलिंदा?

इस घोटाले की परतें 12 जून 2025 को खुलीं। दरअसल, सहायक आयुक्त और सहकारी रजिस्ट्रार के निर्देशों पर एक संयुक्त टीम बनाई गई थी। इस टीम में अपर जिला सहकारी अधिकारी और प्राथमिक सहकारी संघ (PCF) के जिला प्रबंधक शामिल थे। जब टीम ने ऑनलाइन पोर्टल के आंकड़ों का मिलान जमीनी हकीकत से किया, तो उनके होश उड़ गए।

खाद्य एवं रसद विभाग के पोर्टल के मुताबिक, इस खरीद केंद्र ने कुल 73 किसानों से 5,719.50 क्विंटल गेहूं खरीदा था। लेकिन जब भारतीय खाद्य निगम के रिकॉर्ड देखे गए, तो वहां केवल 3,648.53 क्विंटल गेहूं ही पहुंचा था। अब सवाल यह था कि बाकी के 2,070.96 क्विंटल गेहूं गया कहां? (यही वह मोड़ है जहां से यह मामला एक साधारण गलती से बढ़कर एक बड़े अपराध में बदल गया।)

सचिव की अजीब दलील और अधिकारियों की सख्ती

जब जांच टीम ने सचिव राघवेंद्र सिंह चौहान से सवाल किया, तो उन्होंने एक ऐसी कहानी सुनाई जिस पर यकीन करना मुश्किल था। चौहान का दावा था कि बचा हुआ गेहूं 16 किसानों से 'मोबाइल खरीद' के जरिए लिया गया है और वह अनाज अभी उन्हीं किसानों के पास सुरक्षित रखा है। सुनने में यह बात ठीक लग सकती थी, लेकिन जब जांच टीम उन 16 किसानों के पास पहुंची, तो वहां एक दाना भी नहीं मिला। न तो किसानों के पास गेहूं था और न ही किसी सरकारी गोदाम में।

यहाँ एक और गंभीर लापरवाही सामने आई। एडीएम द्वारा नामित खरीद केंद्र प्रभारी होने के बावजूद, चौहान ने अपनी जिम्मेदारी खुद संभालने के बजाय सहकारी नीलामीकर्ता रज्जन लाल श्रीवास्तव को प्रभार सौंप दिया था। यह सीधे तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का उल्लंघन था। ऐसा लगता है कि जानबूझकर एक ऐसा तंत्र बनाया गया था ताकि जवाबदेही तय न हो सके।

गबन की राशि और कानूनी कार्रवाई

गबन की राशि और कानूनी कार्रवाई

विभाग ने जब लागत पत्रक (cost sheet) के आधार पर गणना की, तो पता चला कि इस गबन की कुल कीमत लगभग 55.87 लाख रुपये बैठती है। यह केवल पैसों की चोरी नहीं है, बल्कि उन किसानों के भरोसे और खाद्य सुरक्षा के दावों के साथ खिलवाड़ है।

इस भारी वित्तीय अनियमितता के बाद, रवि सिंह (अपर जिला सहकारी अधिकारी) ने बिना देर किए सदर कोतवाली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए राघवेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। सुनील भारद्वाज (सर्किल ऑफिसर, सदर पुलिस स्टेशन) ने पुष्टि की है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

मुख्य तथ्य एक नजर में

  • कुल गबन राशि: ₹55.87 लाख
  • गायब गेहूं: 2070.96 क्विंटल
  • प्रभावित किसान: 73 किसान (कुल खरीद)
  • मुख्य आरोपी: सचिव राघवेंद्र सिंह चौहान
  • जांच की तारीख: 12 जून 2025
खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव और आगे की राह

खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव और आगे की राह

यह मामला केवल एक अधिकारी की बेईमानी का नहीं है, बल्कि यह सरकारी वितरण प्रणाली की खामियों को भी उजागर करता है। जब अनाज की खरीद का पैसा सरकार देती है और अनाज जनता की थाली के लिए सुरक्षित किया जाता है, तब इस तरह के घोटाले पूरी चेन को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते डिजिटल ट्रैकिंग और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) को और कड़ा नहीं किया गया, तो ऐसे मामले अन्य जिलों में भी दोहराए जा सकते हैं।

अब सबकी नजरें पुलिस की जांच पर हैं। क्या रज्जन लाल श्रीवास्तव की भूमिका भी संदिग्ध है? क्या इसमें कुछ और लोग भी शामिल थे? यह तो आने वाले दिनों में साफ होगा, लेकिन फिलहाल ललितपुर के सहकारी विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

ललितपुर गेहूं घोटाले में कुल कितनी राशि का गबन हुआ है?

इस घोटाले में लगभग 55.87 लाख रुपये की सरकारी राशि का गबन किया गया है। यह गणना लागत पत्रक (cost sheet) के आधार पर की गई है, जिसमें 2070.96 क्विंटल गेहूं गायब पाया गया है।

मुख्य आरोपी राघवेंद्र सिंह चौहान ने खुद को बचाने के लिए क्या तर्क दिया?

चौहान ने दावा किया था कि गायब गेहूं 16 किसानों से मोबाइल खरीद के जरिए लिया गया था और वह अनाज उन्हीं किसानों के पास सुरक्षित रखा है। हालांकि, जांच टीम ने पाया कि यह दावा पूरी तरह झूठा था और किसानों के पास कोई स्टॉक नहीं था।

इस घोटाले का पता कैसे चला और जांच कब हुई?

इस घोटाले का खुलासा 12 जून 2025 को एक संयुक्त जांच टीम द्वारा किया गया। इस टीम में अपर जिला सहकारी अधिकारी और PCF के जिला प्रबंधक शामिल थे, जिन्होंने ऑनलाइन पोर्टल के आंकड़ों का भौतिक सत्यापन किया।

इस मामले में अब तक क्या कानूनी कार्रवाई की गई है?

अपर जिला सहकारी अधिकारी रवि सिंह की शिकायत पर सदर कोतवाली पुलिस ने सचिव राघवेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामले की जांच सर्किल ऑफिसर सुनील भारद्वाज की देखरेख में की जा रही है।

खरीद केंद्र की जिम्मेदारी किसकी थी और क्या लापरवाही हुई?

खरीद केंद्र की जिम्मेदारी सचिव राघवेंद्र सिंह चौहान की थी, जिन्हें एडीएम ने प्रभारी नियुक्त किया था। लापरवाही यह रही कि उन्होंने नियमों के विरुद्ध अपनी जिम्मेदारी नीलामीकर्ता रज्जन लाल श्रीवास्तव को सौंप दी थी, जिससे निगरानी कमजोर हुई।

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द्वारा Sanjana Sharma