उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में सरकारी अनाज की खरीद में एक ऐसा खेल सामने आया है जिसने सहकारी विभाग की नींद उड़ा दी है। करीब 55.87 लाख रुपये की सरकारी राशि का गबन और 2070 क्विंटल गेहूं का रहस्यमयी तरीके से गायब होना कोई मामूली चूक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश लगती है। इस पूरे मामले का केंद्र सहकारी समिति के सचिव राघवेंद्र सिंह चौहान हैं, जिनके खिलाफ अब पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
कहानी शुरू होती है गेहूं की सरकारी खरीद से, जहां किसानों से अनाज लेकर उसे भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों तक पहुंचाना होता है। लेकिन यहां तो खेल ही कुछ और था। कागजों पर तो खरीदारी हुई, लेकिन अनाज गोदाम तक पहुंचने से पहले ही 'गायब' हो गया। हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब तब हुआ जब सचिव खुद को केंद्र प्रभारी बता रहे थे, जबकि असल में कमान किसी और के हाथ में थी।
जांच में कैसे खुला झूठ का पुलिंदा?
इस घोटाले की परतें 12 जून 2025 को खुलीं। दरअसल, सहायक आयुक्त और सहकारी रजिस्ट्रार के निर्देशों पर एक संयुक्त टीम बनाई गई थी। इस टीम में अपर जिला सहकारी अधिकारी और प्राथमिक सहकारी संघ (PCF) के जिला प्रबंधक शामिल थे। जब टीम ने ऑनलाइन पोर्टल के आंकड़ों का मिलान जमीनी हकीकत से किया, तो उनके होश उड़ गए।
खाद्य एवं रसद विभाग के पोर्टल के मुताबिक, इस खरीद केंद्र ने कुल 73 किसानों से 5,719.50 क्विंटल गेहूं खरीदा था। लेकिन जब भारतीय खाद्य निगम के रिकॉर्ड देखे गए, तो वहां केवल 3,648.53 क्विंटल गेहूं ही पहुंचा था। अब सवाल यह था कि बाकी के 2,070.96 क्विंटल गेहूं गया कहां? (यही वह मोड़ है जहां से यह मामला एक साधारण गलती से बढ़कर एक बड़े अपराध में बदल गया।)
सचिव की अजीब दलील और अधिकारियों की सख्ती
जब जांच टीम ने सचिव राघवेंद्र सिंह चौहान से सवाल किया, तो उन्होंने एक ऐसी कहानी सुनाई जिस पर यकीन करना मुश्किल था। चौहान का दावा था कि बचा हुआ गेहूं 16 किसानों से 'मोबाइल खरीद' के जरिए लिया गया है और वह अनाज अभी उन्हीं किसानों के पास सुरक्षित रखा है। सुनने में यह बात ठीक लग सकती थी, लेकिन जब जांच टीम उन 16 किसानों के पास पहुंची, तो वहां एक दाना भी नहीं मिला। न तो किसानों के पास गेहूं था और न ही किसी सरकारी गोदाम में।
यहाँ एक और गंभीर लापरवाही सामने आई। एडीएम द्वारा नामित खरीद केंद्र प्रभारी होने के बावजूद, चौहान ने अपनी जिम्मेदारी खुद संभालने के बजाय सहकारी नीलामीकर्ता रज्जन लाल श्रीवास्तव को प्रभार सौंप दिया था। यह सीधे तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का उल्लंघन था। ऐसा लगता है कि जानबूझकर एक ऐसा तंत्र बनाया गया था ताकि जवाबदेही तय न हो सके।
गबन की राशि और कानूनी कार्रवाई
विभाग ने जब लागत पत्रक (cost sheet) के आधार पर गणना की, तो पता चला कि इस गबन की कुल कीमत लगभग 55.87 लाख रुपये बैठती है। यह केवल पैसों की चोरी नहीं है, बल्कि उन किसानों के भरोसे और खाद्य सुरक्षा के दावों के साथ खिलवाड़ है।
इस भारी वित्तीय अनियमितता के बाद, रवि सिंह (अपर जिला सहकारी अधिकारी) ने बिना देर किए सदर कोतवाली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए राघवेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। सुनील भारद्वाज (सर्किल ऑफिसर, सदर पुलिस स्टेशन) ने पुष्टि की है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
मुख्य तथ्य एक नजर में
- कुल गबन राशि: ₹55.87 लाख
- गायब गेहूं: 2070.96 क्विंटल
- प्रभावित किसान: 73 किसान (कुल खरीद)
- मुख्य आरोपी: सचिव राघवेंद्र सिंह चौहान
- जांच की तारीख: 12 जून 2025
खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव और आगे की राह
यह मामला केवल एक अधिकारी की बेईमानी का नहीं है, बल्कि यह सरकारी वितरण प्रणाली की खामियों को भी उजागर करता है। जब अनाज की खरीद का पैसा सरकार देती है और अनाज जनता की थाली के लिए सुरक्षित किया जाता है, तब इस तरह के घोटाले पूरी चेन को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते डिजिटल ट्रैकिंग और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) को और कड़ा नहीं किया गया, तो ऐसे मामले अन्य जिलों में भी दोहराए जा सकते हैं।
अब सबकी नजरें पुलिस की जांच पर हैं। क्या रज्जन लाल श्रीवास्तव की भूमिका भी संदिग्ध है? क्या इसमें कुछ और लोग भी शामिल थे? यह तो आने वाले दिनों में साफ होगा, लेकिन फिलहाल ललितपुर के सहकारी विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
ललितपुर गेहूं घोटाले में कुल कितनी राशि का गबन हुआ है?
इस घोटाले में लगभग 55.87 लाख रुपये की सरकारी राशि का गबन किया गया है। यह गणना लागत पत्रक (cost sheet) के आधार पर की गई है, जिसमें 2070.96 क्विंटल गेहूं गायब पाया गया है।
मुख्य आरोपी राघवेंद्र सिंह चौहान ने खुद को बचाने के लिए क्या तर्क दिया?
चौहान ने दावा किया था कि गायब गेहूं 16 किसानों से मोबाइल खरीद के जरिए लिया गया था और वह अनाज उन्हीं किसानों के पास सुरक्षित रखा है। हालांकि, जांच टीम ने पाया कि यह दावा पूरी तरह झूठा था और किसानों के पास कोई स्टॉक नहीं था।
इस घोटाले का पता कैसे चला और जांच कब हुई?
इस घोटाले का खुलासा 12 जून 2025 को एक संयुक्त जांच टीम द्वारा किया गया। इस टीम में अपर जिला सहकारी अधिकारी और PCF के जिला प्रबंधक शामिल थे, जिन्होंने ऑनलाइन पोर्टल के आंकड़ों का भौतिक सत्यापन किया।
इस मामले में अब तक क्या कानूनी कार्रवाई की गई है?
अपर जिला सहकारी अधिकारी रवि सिंह की शिकायत पर सदर कोतवाली पुलिस ने सचिव राघवेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामले की जांच सर्किल ऑफिसर सुनील भारद्वाज की देखरेख में की जा रही है।
खरीद केंद्र की जिम्मेदारी किसकी थी और क्या लापरवाही हुई?
खरीद केंद्र की जिम्मेदारी सचिव राघवेंद्र सिंह चौहान की थी, जिन्हें एडीएम ने प्रभारी नियुक्त किया था। लापरवाही यह रही कि उन्होंने नियमों के विरुद्ध अपनी जिम्मेदारी नीलामीकर्ता रज्जन लाल श्रीवास्तव को सौंप दी थी, जिससे निगरानी कमजोर हुई।
Pankaj Verma
अप्रैल 11, 2026 AT 05:55सरकारी खरीद प्रणालियों में इस तरह के गैप्स हमेशा से रहे हैं। जब तक फिजिकल वेरिफिकेशन और डिजिटल रिकॉर्ड्स को रीयल-टाइम में सिंक नहीं किया जाएगा, तब तक कागजों पर अनाज दिखाना और असल में उसे गायब करना आसान रहेगा। इसमें केवल सचिव ही नहीं, बल्कि उन अधिकारियों की भी जिम्मेदारी बनती है जिन्होंने समय रहते ऑडिट नहीं किया।
Sathyavathi S
अप्रैल 12, 2026 AT 13:38हे भगवान! यह तो बिल्कुल किसी क्राइम थ्रिलर मूवी जैसा है। मतलब 2000 क्विंटल गेहूं गायब कर दिया और जब पकड़े गए तो कहा कि किसानों के पास रखा है! क्या मज़ाक बना रखा है? इन लोगों की हिम्मत देखो कि इतनी आसानी से झूठ बोल रहे हैं। अब तो बस यह देखना है कि असली खेल में और कौन-कौन शामिल है। पक्का कोई बड़ा नेटवर्क है इसके पीछे, बस एक मोहरा सामने खड़ा किया है!
Priyank Prakash
अप्रैल 13, 2026 AT 02:34वाह भाई! क्या स्कैम मारा है! 55 लाख रुपये और गायब! :D
Arumugam kumarasamy
अप्रैल 13, 2026 AT 13:58प्रशासनिक अक्षमता का चरम उदाहरण है यह। जब तक हम अपनी नौकरशाही में जवाबदेही तय नहीं करेंगे, तब तक ऐसे सफेदपोश अपराधी व्यवस्था का लाभ उठाते रहेंगे। यह केवल एक जिले की बात नहीं है, बल्कि पूरे देश की खाद्य सुरक्षा प्रणाली पर एक धब्बा है। कठोरतम दंड ही एकमात्र समाधान है ताकि भविष्य में कोई ऐसी हिमाकत न करे।
Rashi Jain
अप्रैल 14, 2026 AT 06:44अगर हम इस मामले की गहराई से जांच करें तो पता चलेगा कि मोबाइल खरीद का जो बहाना बनाया गया था वह दरअसल सिस्टम की एक बड़ी खामी को छुपाने की कोशिश थी क्योंकि जब तक डिजिटल पोर्टल पर एंट्री होती है तब तक भौतिक रूप से अनाज की जांच करना मुश्किल होता है और इसी अंतराल का फायदा उठाकर इन लोगों ने इतना बड़ा गबन कर लिया होगा। मुझे लगता है कि भविष्य में इस तरह के फ्रॉड को रोकने के लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे हर दाने की ट्रैकिंग हो सके और कोई भी अधिकारी अपनी मर्जी से रिकॉर्ड में हेरफेर न कर पाए, क्योंकि जब तक मैन्युअल हस्तक्षेप रहेगा तब तक भ्रष्टाचार की गुंजाइश बनी रहेगी और किसानों का हक इसी तरह मारा जाएगा।
Anirban Das
अप्रैल 15, 2026 AT 09:43वही पुरानी कहानी है, कुछ नहीं बदलेगा। :/
Ashish Gupta
अप्रैल 17, 2026 AT 00:21चलो कम से कम पकड़े तो गए! अब बस सख्त एक्शन होना चाहिए ताकि दूसरों को सबक मिले 👊🔥
Suraj Narayan
अप्रैल 18, 2026 AT 08:29बिल्कुल सही! अब समय आ गया है कि इन भ्रष्टाचारियों को जेल की सलाखों के पीछे डाला जाए। डर पैदा करना जरूरी है वरना ये लोग और ज्यादा emboldened हो जाएंगे।
Suman Rida
अप्रैल 18, 2026 AT 15:06उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और सभी दोषियों को सजा मिलेगी।
Raman Deep
अप्रैल 19, 2026 AT 15:34सही बात है भाई, इन लोगो को सबक सिखाना ही पड़ेगा 💯🙏
Dr. Sanjay Kumar
अप्रैल 20, 2026 AT 10:24भाई साहब, क्या गजब की कहानी सुनाई सचिव जी ने! 'मोबाइल खरीद' के नाम पर गेहूं गायब! मतलब लेवल ही अलग है झूठ बोलने का।
Mayank Rehani
अप्रैल 21, 2026 AT 04:54यह मामला प्रॉक्सी मैनेजमेंट और इंटरनल कंट्रोल फेल्योर का क्लासिक केस है। जब प्रभार अनधिकृत व्यक्ति को सौंपा गया, तो ऑडिट ट्रेल पूरी तरह से दूषित हो गया।
Anamika Goyal
अप्रैल 23, 2026 AT 01:39बेचारे किसान तो बस भरोसा करते हैं। क्या वाकई उन 16 किसानों को कोई पैसा मिला या उनके नाम पर भी फर्जीवाड़ा हुआ?
Prathamesh Shrikhande
अप्रैल 23, 2026 AT 14:14बहुत दुखद है कि अन्न के साथ ऐसा खिलवाड़ किया गया 😔
sachin sharma
अप्रैल 24, 2026 AT 14:58सब कुछ ठीक है, बस जांच पूरी हो और सच सामने आए।
Robin Godden
अप्रैल 26, 2026 AT 09:02मैं आशा करता हूँ कि संबंधित अधिकारी इस मामले में पूरी ईमानदारी से कार्य करेंगे।
Pranav nair
अप्रैल 26, 2026 AT 21:14सिस्टम की ऐसी ही हालत है हर जगह :)